देवरिया, उत्तर प्रदेश-अर्जुन यादव की रिपोर्ट- श्रम प्रवर्तन अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि प्रमुख सचिव, श्रम, उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों के अनुपालन में श्रम विभाग द्वारा जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला टास्क फोर्स के माध्यम से 31 अगस्त, 2026 तक विशेष अभियान चलाकर जनपद को बाल श्रम मुक्त बनाने की कार्रवाई की जा रही है।
इसी क्रम में जिला टास्क फोर्स ने गौरीबाजार क्षेत्र में अभियान चलाकर 03 गैर-खतरनाक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान नियोजित 03 बाल/किशोर श्रमिकों को चिन्हित कर मुक्त कराया गया तथा संबंधित प्रतिष्ठान स्वामियों के विरुद्ध निरीक्षण टिप्पणी जारी की गई।
अभियान के दौरान व्यापारियों एवं आमजन से बाल श्रमिकों से कार्य न कराने की अपील की गई। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक उत्तर प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाना है। बाल श्रमिकों को मुक्त कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने, उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास तथा विभिन्न विभागों की कल्याणकारी योजनाओं से आच्छादित कर कौशल विकास के माध्यम से उनके परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने समस्त व्यापारियों, प्रतिष्ठान स्वामियों, दुकानदारों एवं फैक्ट्री संचालकों से अपील की कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का कार्य न कराया जाए तथा 14 से 18 वर्ष के किशोरों को किसी भी खतरनाक कार्य या प्रक्रिया में नियोजित न किया जाए।
उन्होंने बताया कि बाल श्रम कराना दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर 6 माह से 2 वर्ष तक का कारावास अथवा ₹20,000 से ₹50,000 तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। पुनरावृत्ति की स्थिति में और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने आमजन से अपील की कि यदि कहीं भी बाल श्रम होता दिखाई दे तो इसकी सूचना श्रम विभाग, विकास भवन, देवरिया, जिला टास्क फोर्स अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर दें। जनसहयोग से ही वर्ष 2027 तक जनपद देवरिया को बाल श्रम मुक्त बनाया जा सकता है तथा प्रत्येक बच्चे को शिक्षा और सुरक्षित बचपन का अधिकार दिलाया जा सकता है।









