गजेन्द्र नाथ पांडेय -महराजगंज उत्तर प्रदेश। पूर्वोत्तर रेलवे के जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा ट्रैक की सुरक्षा के लिए पटरी मरम्मत के लिए ठेका दिया गया है । ठेकेदार बाहर से मिट्टी लाने के बजाय पटरी के सटे खनन कर मिट्टी निकाल कर पटरी पर मिट्टी डाल रहा है । जिससे पटरी के स्लोप सटे गड्ढ़ा बन रहा है। स्थानीय रेलवे जिम्मेदार अधिकारी पटरी के सटे बन रहे गडढ़े को लेकर मौन साधे हुए हैं।
पूर्वोत्तर रेलवे के आनंदनगर नौतनवा रेल रूट पर स्थित लक्ष्मीपुर से बरगदवा ढाला तक बरसात से सुरक्षा के लिए रेलवे ट्रैक के पटरी मरम्मत के लिए ठेका दिया गया है ।लेकिन ठेकेदार बाहर से मिट्टी पटरी पर लाकर न डालने बजाए पटरी के सटे खनन कर गड्ढ़ा बना दे रहा है
रेलवे ट्रैक की पटरी बरसात में कैसे सुरक्षित रह सकती है ।जब पटरी के सटे खनन कर गड्ढ़ा बन रहा-क्षेत्र में चर्चा का बना:रेलवे ट्रैक की बरसात में सुरक्षा के लिए पटरी मरम्मत का कार्य ठेकेदार को दिया गया है। जिम्मेदार रेलवे के अधिकारियों के द्वारा।ऐसे में ठेकेदार रेलवे पटरी स्लोप के सटे ही खनन कर मिट्टी पटरी पर डाल रहा है ।जब पटरी के स्लोप के सटे गड्ढ़ा तैयार हो जा रहा है । ऐसे में तेज बारिश में मिट्टी पटरी पर कैसे रूकेगा? पटरी के स्लोप से सटे गड्ढ़ा में मिट्टी बहकर जमा हो जाएगा।तो बरसात में कैसे सुरक्षित रहेगा पटरी?
जंहा पर पटरी नाम मात्र सटे गड्ढ़ा है वहां नहीं मरम्मत हो रहा पटरी-बरसात हो जाए तो कैसे मरम्मत होगा पटरी:- रेलवे के जिम्मेदार अधिकारी व ठेकेदार पटरी की मरम्मत पटरी के सटे खनन के पटरी के स्लोप के सटे गड्ढ़ा बना रहे हैं । जबकि इसी बीच में रेलवे ट्रैक की पटरी नाम मात्र है । बरसात समय से पहले रह रह कर हो रहा है । ऐसे जगह पर जिम्मेदार अधिकारी व ठेकेदार के द्वारा पटरी का मरम्मत करना आवश्यक था । जिससे मिट्टी बैठे बरसात में जिससे मिट्टी पटरी पर रूके।
लेकिन ऐसे जगह पर रेलवे ट्रैक के सुरक्षा के लिए पटरी का मरम्मत नहीं कर रहे हैं । चूंकि इस जगह पटरी मरम्मत के लिए बाहर से मिट्टी लाना पड़ेगा।इस लिए मौन साधे हैं।अगर बरसात हो गया गड्ढ़ा भर जाएगा तब कैसे करेंगे पटरी का मरम्मत?लेकिन जहां पटरी है वहीं पटरी के स्लोप से सटे खनन कर मिट्टी पटरी पर डालने के साथ ही पटरी के सटे गड्ढ़ा बना दे रहे हैं ।जिससे बजट मरम्मत के नाम खर्च कर सके ।
जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों?जब रेलवे ट्रैक की पटरी की सुरक्षा मरम्मत के लिए बजट को खर्च किया जा रहा है।ठेकेदार के माध्यम से तो जिम्मेदार अधिकारी ऐसे जगह पर सबसे पहले पटरी की मरम्मत उस स्थान पर क्यों नहीं करा रहे जहां पर नाम मात्र की पटरी है सटे गड्ढ़ा है । बाहर से मिट्टी लाकर पटरी का मरम्मत होना है। बरसात में पानी गड्ढ़ा में भर जाएगा रास्ता नहीं रहेगा तो कैसे करेंगे मरम्मत।जब की ठेकेदार पटरी के स्लोप से सटे खनन कर ज़हां पहले से मौजूद हैं पटरी उसी जगह पर मरम्मत कर रहा है ।वह भी पटरी के स्लोप के सटे गड्ढ़ा बना दे रहा है। जिससे बरसात में पटरी की नई मिट्टी बहकर गड्ढ़ा में आ जाएगा। जिम्मेदार अधिकारी आखिर क्यों मौन पड़े हैं। बजट खर्च किया जा रहा तो मानक व रेलवे ट्रैक के पटरी के स्लोप के सटे खनन क्यों? दूर से अथवा बाहर से मिट्टी क्यों नहीं मंगाई जा रही है ।
जांच हो तो पटरी का मरम्मत सुरक्षा के लिए हो रहा है तो बड़ा पोल स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों का खूलेगा।अगर जांच हो ।जब रेलवे ट्रैक की पटरी की सुरक्षा के लिए मरम्मत का बजट जारी किया गया है तो पटरी के स्लोप के सटे गड्ढ़ा बना कर मिट्टी क्यों निकाला जा रहा है ।जो बरसात होते ही बह जाएगा।









