पराली जलाने पर सख्ती: जिला प्रशासन का कड़ा रुख, उल्लंघन पर भारी जुर्माना-जानिए जुर्माना की राशि

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पराली जलाने पर सख्ती: जिला प्रशासन का कड़ा रुख, उल्लंघन पर भारी जुर्माना-जानिए जुर्माना की राशि

गजेन्द्र नाथ पांडेय -महराजगंज उत्तर प्रदेश।जनपद में गेहूं की कटाई के बाद फसल अवशेष (पराली) जलाने की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि खेतों में गेहूं अवशेष जलाना पूर्णतः प्रतिबंधित है और ऐसा करने वालों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि पराली जलाना न केवल पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंचाता है, बल्कि मानव स्वास्थ्य, मिट्टी की उर्वरता और जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

जिलाधिकारी ने बताया कि पराली जलाने की प्रत्येक घटना पर संबंधित किसान से पर्यावरणीय प्रतिकर के रूप में जुर्माना वसूला जाएगा। दो एकड़ से कम भूमि वाले किसानों पर प्रति घटना 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, दो एकड़ से अधिक और पांच एकड़ से कम भूमि वाले किसानों के लिए यह राशि 10,000 रुपये निर्धारित की गई है। पांच एकड़ से अधिक भूमि रखने वाले किसानों पर प्रति घटना 30,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा, संबंधित क्षेत्र के लेखपाल, ग्राम पंचायत अधिकारियों और कृषि विभाग के कर्मचारियों की भी जवाबदेही तय की जाएगी।

कृषि विभाग द्वारा किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। हैप्पी सीडर, सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS), रोटावेटर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से फसल अवशेषों को खेत में ही मिलाकर जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इन यंत्रों पर सरकारी योजनाओं के तहत अनुदान की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से राहत मिल सके।

प्रशासन ने सभी उपजिलाधिकारियों, तहसीलदारों और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखें और पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही, ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को इसके दुष्प्रभावों और विकल्पों के बारे में जानकारी देने पर भी जोर दिया गया है।

जिला प्रशासन ने सभी किसानों से अपील की है कि वे पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें और पराली न जलाकर वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाएं, जिससे स्वच्छ पर्यावरण और सतत कृषि का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

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