महराजगंज।एक तरफ सरकार द्वारा प्रदेश व देश में राष्ट्रीय बन संपदा की सुरक्षा का बन महोत्सव को लेकर कार्यक्रम कर जागरूक किया जाता है की बन संपदा से पर्यावरण संरक्षित रहता है ।मानव जीवन के लिए पेड़ पौधा आवश्यक है। जिससे सभी का जीवन सुरक्षित रहा है ।
सरकार के द्वारा पर्यावरण सुरक्षा के लिए प्रत्येक वर्ष करोड़ों का बजट खर्च पौधरोपण किया जाता:-पर्यावरण बना रहे जिसके लिए करोड़ों खर्च कर पौधरोपण किया जाता है ।यह सब देशहित व जनता के सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं दिया जा रहा है। लेकिन कुछ जिम्मेदार विकास की आंड़ में सरकार व शासन के मंशा पर पानी फेर रहे हैं।
जंगल में सड़क निर्माण के लिए जंगल से मिट्टी खनन कर राष्ट्रीय बन संपदा को भारी क्षति पहुंचाने की कोशिश :-बनग्राम को ग्राम पंचायत शासन के द्वारा घोषित किया गया है । जिससे मूलभूत सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। जिसमें सड़क निर्माण सबसे प्रमुख है
फरेंदा रेंज में देखें सड़क निर्माण का हाल :- कोमल चौराहा से रानीपुर चौराहा को जोड़ने के लिए शासन के निर्देश पर कार्यदाई संस्था व ठेकेदार के द्वारा इंटरलांकिंग सड़क का निर्माण कराया जा रहा है ।जिसके लिए शासन द्वारा बजट भी दिया गया है
सड़क की पटरी बनाने के लिए जंगल में जेसीबी से खनन सड़क के सटे गहरा गड्ढा सांखू के पेड़ पर भी संकट: इंटर लाकिंग सड़क निर्माण के लिए कार्यदाई संस्था व ठेकेदार के द्वारा जेसीबी मशीन से सड़क से सटे ही खनन कर गहरा गड्ढा बना दिया जा रहा है। इतना ही जंगल के सैकड़ों किमती सांखू के पेड़ का जड़ दिखाई दे रहा है।गड्ढा के सटे छोर पर रुका है।अगर तेज आंधी हवा आ जाए तो गड्ढ़ा से सटे पेड़ जमीन पर आ जाएगा।
आखिर पेड़ की सुरक्षा को भी लेकर कार्यदाई संस्था को देखना चाहिए।अगर कार्यदाई संस्था सड़क बनाने की जिम्मेदारी लिया है तो पेड़ की भी सुरक्षा आवश्यक है।अगर जंगल की बाहर से मिट्टी आया होता तो शायद जंगल का किमती सांखू का पेड़ संकट में नहीं आता।
फरेंदा बनक्षेत्राधिकारी का इस संबंध में देखें क्या कहा? बनक्षेत्राधिकारी का कहना है कि मामला संज्ञान में है ।सड़क निर्माण के बाद ठेकेदार मिट्टी गिरा कर खनन किए गए गड्ढा का भराई करेगा।तभी बिल बाउचर पर हस्ताक्षर होगा और भुगतान भी होगा









