गजेन्द्र नाथ पांडेय-purvanchal bulletin- निष्पक्ष खबर अब तक– उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर चल रहे विवाद के बीच उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की खबर है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी उपभोक्ता पर जबरन स्मार्ट प्रीपेड मीटर नहीं लगाया जा सकता और यह पूरी तरह उपभोक्ता की सहमति पर निर्भर होगा।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने संसद में स्पष्ट किया कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के अनुसार स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं है। बिजली कंपनियां किसी भी उपभोक्ता पर प्रीपेड मीटर थोप नहीं सकतीं। इस बयान के बाद उन लाखों उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है जिनके मीटर बिना सहमति के प्रीपेड मोड में बदल दिए गए थे।
इसी बीच उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार और पावर कॉर्पोरेशन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि प्रदेश में लगभग 70 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के मीटर उनकी सहमति के बिना प्रीपेड मोड में बदल दिए गए हैं, जो कानून का उल्लंघन है। परिषद ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषी अधिकारियों व कंपनियों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही जिन उपभोक्ताओं के मीटर जबरन प्रीपेड किए गए हैं, उन्हें फिर से पोस्टपेड सिस्टम पर लाने की मांग भी उठाई गई है।
तकनीकी स्तर पर भी प्रीपेड सिस्टम को लेकर कई समस्याएं सामने आ रही हैं। सर्वर पर अधिक लोड होने के कारण रिचार्ज के बाद भी बैलेंस समय पर अपडेट नहीं हो रहा, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित हो रही है। नियमानुसार रिचार्ज के दो घंटे के भीतर बिजली चालू हो जानी चाहिए, लेकिन कई जगह 24 घंटे तक बिजली बहाल नहीं हो पा रही है।
विभाग ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे अपना मोबाइल नंबर अपडेट रखें ताकि बैलेंस कम होने पर सूचना मिल सके। वहीं रिचार्ज के दो घंटे बाद भी बिजली न आने पर उपभोक्ता 1912 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। प्रदेश में 31 दिसंबर 2028 तक सभी मीटर स्मार्ट करने का लक्ष्य है, लेकिन सहमति को लेकर विवाद अभी जारी है।









